- 'भाई साहब, आज स्कूटर कहाँ है आपका? पैदल चले आ रहे हैं?" मित्र ने मुझे आते देखा तो हैरानी से पूछा।
- "स्कूटर घर से बाहर निकालने के लिए रास्ता ही नहीं है।" मैंने फूलती सांस को नियंत्रित करते हुए जवाब दिया।
- "क्यों?"
- "क्योंकि बाहर की नाली बनाई जा रही है।"
- "वह तो बन गई थी, आपने फ़ोन पर बताया था।"
- "वह तो घर के एक साइड की नाली थी। अब यह दूसरे साइड की बननी है।"
- "कितने साइड की बननी हैं?"
- "घर के एक तरफ़ की नाली बन गयी, दूसरी तरफ़ की पुरानी नाली आज तोड़ दी गयी है, वहां अब नई नाली बनेगी।"
- "पहली साइड की जहां नाली बन गयी है, वहां से स्कूटर निकाल लीजिए, क्या दिक्कत है?"
- "उधर मैंने अभी रैंप नहीं बनवाया। पुराना रैंप नई नाली बनाने वालों ने तोड़ दिया था।"
- "तो बनवा लीजिये। किसने मना किया।"
- "कैसे बनवाऊं? वे कह रहे हैं अभी सड़क बनेगी, उसके बाद बनवाना।"
- "ओह, तो सड़क क्यों नहीं बनी?"
- 'क्योंकि नई नालियां अभी बन रही हैं। जब तक सभी नालियां नहीं बन जाती तब तक सड़क नहीं बनेगी।"
- "तो आपको स्कूटर बाहर निकाल लेना चाहिए था, दूसरी तरफ़ का रैंप तोड़ने से पहले।"
- "कैसे निकालता? दोपहर में मैं खाना खा रहा था कि मशीन की आवाज़ आयी, जब तक बाहर पहुंचता उन्होंने रैंप तोड़ दिया था। बाहर आया और यह सब देखता रह गया।"
मित्र चुप हो गए। मैं उनकी तरफ़ से उछाले जाने वाले नए सवाल की बाट जोहने लगा। जब वह कुछ नहीं बोले तो मैंने उन्हें अपने मोबाइल में टूटी नालियों की तस्वीर दिखाई। नालियां टूटने के बाद पानी सड़क पर आ गया था, मेन नाला भी तोड़ दिया गया था।सारा दृश्य गंदा लग रहा था।
- "यहां तो खूब मच्छर आ रहे होंगे?" तस्वीर देखने के बाद मित्र भी सिर पकड़ कर बैठ गए थे।
मैं सोचने लगा कि मच्छर तो मच्छर, अग़र बारिश होगी तो इन्हीं नालियों और नाले का गंदा पानी निचले घरों में घुस जाएगा।
पर मैं कुछ बोला नहीं, चुप ही रहा। क्या ही बोलता!!




